अस्तित्व - संघर्ष कभी खत्म नहीं होता यह उपन्यास एक गहरे और गहन द्वंद्व की कहानी है , जिसमें दो विरोधाभासी सभ्यताओं के बीच संघर्ष को प्रस्तुत किया गया है। पहली सभ्यता मानव सभ्यता है , जो समभाव , लोकतंत्र , समानता और आपसी मेलजोल पर विश्वास करती है , जीवन को नैतिकता और सही आचरण के आधार पर जीने की कोशिश करती है। दूसरी सभ्यता मलेच्छ है , जो केवल शक्ति के आधार पर अपने अस्तित्व को बनाये रखने का प्रयास करती है , और सब कुछ शक्ति से पाने का सपना देखती है। इस उपन्यास में नायक अर्जुन पंडित है , जो अपनी मानव सभ्यता के सिद्धांतों को बचाने और उसकी रक्षा करने के लिए संघर्ष करता है। वह सच्चाई , न्याय , और मानवता के आदर्शों पर विश्वास करता है। इसके विपरीत , सम्राट दुर्योधन चेंदेला का लक्ष्य है मलेच्छ सभ्यता के सिद्धांतों को मान्यता देना और मानव सभ्यता पर अपना नियंत्रण स्थापित करना। वह शक्ति के बल पर अपने साम्राज्य का विस्तार करना चाहता है। मानव सभ्यता के सिद्धांतों को बचाने की कोशिश करते हुए अर्जुन पंडित का संघर्ष न केवल बाहरी दुनिया में , बल्कि अपने भीतर भी हो रहा होता है। यह संघर्ष यह सवा...
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